जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च। तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि॥ २-२७

jātasya hi dhruvo mṛtyurdhruvaṃ janma mṛtasya ca। tasmādaparihārye’rthe na tvaṃ śocitumarhasi॥ 2-27

जन्मने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है इसलिए जो अटल है अपरिहार्य है उसके विषय में तुमको शोक नहीं करना चाहिये।

Death is certain for the born, and re-birth is certain for the dead; therefore you should not feel grief for what is inevitable.

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Dr. Chetana Pandey
A Hindi scholar, writer and teacher

परकीया


छाप तिलक

छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके


प्रेम भटी का मदवा पिलाइके


मतवारी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके


गोरी गोरी बईयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ


बईयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके


स्तवनम्

Aarti

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

वाकोवाक्यम् सम्मान समारोह 2020

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