नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः॥ ३-८

niyataṃ kuru karma tvaṃ karma jyāyo hyakarmaṇaḥ। śarīrayātrāpi ca te na prasiddhyedakarmaṇaḥ॥ 3-8

तुम अपने नियत कर्तव्य कर्म करो क्योंकि अकर्म से श्रेष्ठ कर्म है। तुम्हाम्हारे अकर्म होने से तुम्हारा शरीर निर्वाह भी नहीं सिद्ध होगा।

Therefore, do you perform your allotted duty; for action is superior to inaction. Desisting from action, you cannot even maintain your body.

Contributor of the month

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Dr. Chetana Pandey
A Hindi scholar, writer and teacher

परकीया


छाप तिलक

छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके


प्रेम भटी का मदवा पिलाइके


मतवारी कर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके


गोरी गोरी बईयाँ, हरी हरी चूड़ियाँ


बईयाँ पकड़ धर लीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके


स्तवनम्

Aarti

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

वाकोवाक्यम् सम्मान समारोह 2020

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